म्यांमार में सेन्य तख्तापलट पर भारत तथा अनय देशो की प्रतिक्रिया क्या है

हाल ही में म्यांमार में सैन्य  तख्तापलट के बाद सेना ने सत्ता हासिल कर ली, आपको बता दे कि वर्ष 1948 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रा प्राप्ती के बाद से म्यांमार में तीसरा तख्तापलट है.

  म्यांमार में सैन्य  तख्तापलट का कारण क्या है.

          विषय का अनुक्रमांक

    1. म्यांमार में सेन्य तख्तापलट          

    2. विश्व की प्रतिक्रिया

    3. म्यांमार में भारत के सामरिक हित  

    4. आगे की राह क्या है.

 

 

1.     म्यांमार में सैन्य  तख्तापलट :-

·        म्यांमार में एक वर्ष की अवधि के लिए आपातकाल लागू कर दिया गया है. और लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेता ‘आंग सान सू की’ को हिरासत में लिया गया है.

·    प्राय: तख्तापलट का अर्थ हिंसक और अवैध रूप से लोकतान्त्रिक रूप से चुनी गई सरकार की शक्तियों को हत्याने से होता है.

·      वर्ष 2021 की शुरुआत में जब नवनिर्वाचित संसद का पहला सत्र आयोजित किया जाना था. तभी संसदीय चुनावों में भारी धोखाधड़ी का हवाला देते हुए सेना द्वारा एक वर्ष की अवधि के लिए आपातकाल लागु कर दिया गया.

·    नवम्बर 2020 में हुए संसदीय चुनावो में ‘आंग सान सू की के राजनितिक दल ‘नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD)’ को अधिकांश सीटें हासिल हुई.

·    वर्ष 2008 में सेना द्वारा तेयार किये गये संविधान के मुताबिक, म्यांमार की संसद में सेना के पास कुल सीटो का 25% हिस्सा होता है. और कई प्रमुख मंत्री पद भी सेन्य नियुक्तियों के लिए आरक्षित है.

 समाजवाद ये होता हे.

2.    म्यांमार तख्तापलट  पर विश्व की प्रतिक्रिया :-

·        चीन – चीन ने म्यांमार तख्तापलट के मामले पर स्पष्ट किया है. कि म्यांमार में सभी पक्ष राजनितिक और सामाजिक स्थिरता बनाएं रखने के लिए संविधान तथा कानूनी ढांचे के तहत अपने मत भेदों को जल्द ही समाप्त कर लेंगे.

·    अमेरिका – अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने म्यांमार में सेना द्वारा तख्तापलट किये जाने के बाद म्यांमार पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी और अंतराष्ट्रीय समुदाए से इस मसले पर एकजुट की मांग की है.

·    आसियान देश – आसियान की अध्यक्षता कर रहे ब्रूनेई ने म्यांमार में सभी पक्षों के बीच संवाद और सामंजस्य का आहन किया है.

·    भारत – भारत भी म्यांमार में लोकतान्त्रिक परिवर्तन की प्रकिया का समर्थन करता है. भारत ने म्यांमार के हालिया घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है.

3.     म्यांमार में भारत के सामरिक हित :-

a.     म्यांमार की सेना के साथ भारत के सम्बन्ध –

·        म्यांमार के साथ भारत के सेन्य-राजनयिक सम्बन्ध भारत की ‘एक्ट ईस्ट पालिसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

·        वर्ष 2020 में सेनाध्यक्ष और विदेश सचिव के दौरे की पूर्व संध्या पर म्यांमार ने 22 भारतीय विद्रोहियो को वापस भारत को सोंपा था. साथ ही भारत की ओर से म्यांमार को सेन्य हार्डवेअर , जिसमे 105 MM लाईट आर्टिलरी गन, नौसेनिक गनबोट और हलके तारपीडो आदि की बिक्री बढाने का भी निर्णय लिया गया था.

·        दोनों देशो के बीच सहयोग का हालिया उदाहरण देखें तो म्यांमार द्वारा अपने टीकाकरण अभियान में भारत से भेजे गये कोरोना वायरस के टिके की 1.5 मिलियन खुराक का प्रयोग किया जा रहा है. जबकि वहां चीन की 3,00,000 खुराक पर फ़िलहाल रोक लगा दी गई है.


    B. म्यांमार मे भारत के हित

अवसंरचना और कनेक्टिविटी: भारत ने म्यांमार के साथ कई अवसरचना और विकास सम्बन्धी परियोजनाओ की शुरुआत की है. क्योंकि भारत म्यांमार को पूर्वी एशिया और आसियान देशो में प्रवेश द्वार के रूप में देखता है.

·     म्यांमार के रखाइन प्रान्त में वर्ष 2021 तक महत्वपूर्ण सितवे बंदरगाह का परिचालन शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है.

·     भारत द्वारा त्रिपक्षीय राजमार्ग ( भारत-म्यांमार-थाईलेंड ) और कलादान मल्टी-मोडाल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट जेसी बुनियाद ढांचा परियोजनाओ में सहायता की जा रही है.

·     कलादान परियोजना कोलकाता को म्यांमार के सित्वे और फिर म्यांमार की कलादान नदी से भारत के उत्तर-पूर्व को जोड़ेगी.

·     दोनों देशो ने वर्ष 2018 में भूमि सीमा पार करने से सम्बंधित समझोते पर हस्ताक्षर किये थे. जिसके माध्यम से भारत-म्यांमार सीमा पर प्रवेश/ निकाए के दो अंतराष्ट्रीय बिन्दुओ पर सीमा पार करने के लिए वैध दस्तावेजो वाले यात्रीयो को यात्रा करने की अनुमति दी गई थी.

C. रोहिंग्या मुद्दा :- भारत और बंग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में मोजूद रोहिंग्या शरणार्थीयों की सुरक्षित, स्थाई, और शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के लिए भारत ने अपनी प्रतिबधता व्यक्त की है.

      4. आगे की राह क्या है. (म्यांमार में तख्तापलट)

·        भारत ने म्यांमार के हालिया घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है. किन्तु म्यांमार की सेना से अपने सम्बन्ध ख़राब करना भारत के लिए एक व्यवहार्य विकल्प नहीं होगा, क्योंकि म्यांमार के साथ भारत के कई महत्वपूर्ण आर्थिक और सामरिक हित जुड़े है.

·    म्यांमार में तख्तापलट की गतिरोध को समाप्त करने में सहायता करने के लिए भारत को संवेधानिकता और संघवाद से सम्बंधित अपने अनुभवों को साझा करना चाहिए. ताकि गतिरोध की इस समस्या से जल्द-से-जल्द निपटा जा सके.

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धन्यवाद-------

 

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म्यांमार में सेन्य तख्तापलट पर भारत तथा अनय देशो की प्रतिक्रिया क्या है म्यांमार में सेन्य तख्तापलट पर भारत तथा अनय देशो की प्रतिक्रिया क्या है Reviewed by Teck Qureshi on मार्च 25, 2021 Rating: 5

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