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समाजवाद क्या है. समाजवाद की परिभाषा, मूल तत्व , समाजवाद के पक्ष में तर्क , समाजवाद के विपक्ष में तर्क.

समाजवाद क्या है ( What is the Socialism ).

. समाजवाद अंग्रेजी भाषा के सोशलिज्म (socialism) शब्द का हिन्दी रुपन्तर्ण  है। सोशलिज्म शब्द की उत्पत्ति सोशियस (socious) शब्द से हुई है  जिसका शाब्दिक अर्थ समाज होता है


विषय का अनु:क्रम    

समाजवाद की परिभाषा

समाजवाद के मूल तत्व तथा समाजवाद की मुख्य विशेषताएं

समाजवाद के पक्ष में तर्क

समाजवाद के विपक्ष में तर्क

 

समाजवाद की परिभाषा —

समाजवाद वह निति या सिद्धांत है जिसका मकसद केन्द्रीय लोकतान्त्रिक सत्ता के द्वारा संपत्ति का समान वितरण और उत्पादन करना है. समाजवाद अंग्रेजी भाषा के सोशलिज्म (socialism) शब्द का हिन्दी रुपन्तर्ण  है। सोशलिज्म शब्द की उत्पत्ति सोशियस (socious) शब्द से हुई है  जिसका शाब्दिक अर्थ समाज होता है

समाजवाद असमानताओ के कारण अस्तित्व में आया. ये विशेषकर वे असमानताएँ थी, जो ओद्योगिक पूंजीवादी अर्थव्यवस्था से उत्पन्न उसमे बाद तक बनी रही. समाजवाद का मुख्य उद्देश्य वर्तमान असमानताओ को न्यूनतम करना और संसाधनों का न्यायपूर्ण बँटवारा है. अर्थात: ये व्यवस्था पूंजीवाद का विरोध करती है. तथा आर्थिक समानता का समर्थन करती है.

समाजवाद के मूल तत्व तथा समाजवाद की मुख्य विशेषताएँ :--

1.   समाजवाद में पूंजीवाद का विरोध:- समाजवादी विचारधारा के व्यक्ति हमेशा पूंजीवाद का विरोध करते है. उनका मानना है कि समाज में असमानता तथा अन्याय का मूल कारण पूंजीवाद ही है. समाजवादियो के विचार में पूंजीपति व श्रमिको में सघंर्ष अनिवार्य है क्यूंकि पूंजीवाद में उत्पादन का समान वितरण न होने के कारण संपत्ति पर पूंजीवाद का अधिकार होता है समाजवादी विचारधारा के लोगो का मानना है कि समाजवाद उत्पादन व वितरण के साधन को पूंजीपतियों के हाथो में सोंपना चाहता है.

2.   व्यक्तिवाद का विरोध:- समाजवादी लोगों के विचार व्यक्तिवाद के विपरीत है. समाजवादियो का तर्क है कि समाज के माध्यम से ही व्यक्ति का सम्पूर्ण विकास हो सकता है।  इसलिए एक व्यक्तिय के विकास से बेहतर समाज का विकास है.

3.   आर्थिक समानता:- समाजवादी विचारको का मत है कि आर्थिक असमानता अधिकाश देशो का मूल कारण है इसी कारण समाजवादी विचारक आर्थिक समानता पक्ष-कार होते है.

4.   लोकतंत्रीय शासन :- समाजवादी विचारको का मत है. कि लोकतंत्र एक ऐसा तंत्र है, जिसमे राज्य की संप्रभुता शक्ति जनता में पाई जाती है, तथा शासन के सभी अंग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जनता के प्रति उत्तरदायी रहते है. अब्राहम लिंकन ने कहा था कि “ लोकतंत्र जनता का, जनता के लिए, तथा जनता के द्वारा शासन है”.

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समाजवाद के पक्ष में तर्क—

1.     वर्ग संघर्ष :- समाजविदो का तर्क है कि मानव समाज का सम्पूर्ण इतिहास वर्ग-संघर्ष का इतिहास है, सामंती समाज में किसान खेती करते थे.और सामंती उनसे कर वसूल कर उनका शोषण करते थे. उसी तरह पूंजीवादी समाज में श्रमिक उत्पादन करते है और पूंजीपति अतिरिक्त मूल्य द्वारा उनके शोषण पर जीवित रहते है.

2.     शोषण का अंत—समाजवादी विचारधारको का मत है, कि पूंजीवादी व्यवस्था में पूंजीपतियों के शड़यन्त्रो के द्वारा द्वारा ही निर्धनों व श्रमिको का शोषण होता है. और ये विचारधारा शोषण के अंत में विश्वास रखती है. विश्व के किसान,श्रमिक,निर्धन इसका समर्थन करते है,

3.     उत्पादन पर सामाजिक नियंत्रण :- समाजवादी विचारो का मत है, कि उत्पादन और वितरण के सभी साधनों पर राज्य का अधिकार स्थापित हो. जिससे बीच की खाई को पाटा जा सके.

4.     उन्नति के समान अवशर :- समाजविद सभी को उन्नति के समान अवशर मिलने के पक्षपाती होते है, उनका विचार व्यक्ति और समाज को आगे बढाने के लिए सभी को सभी क्षेत्रो में समान अवशर प्रदान करने चाहिए.

 समाजवाद के विपक्ष में तर्क—

1.     समाजवाद प्रजातंत्र का विरोधी:- प्रजातंत्र में व्यक्ति के अस्तित्व को अत्यंत श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है परन्तु समाजवाद में वह राज्य रूपी विशाल मशीन में एक निर्जीव पूर्जा बनकर रह जाता है

2.     समाजवाद हिंसा को बढ़ावा देता है:- समाजवादी व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए क्रन्तिकारी व हिंसा का मार्ग अपनाता है, वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने में विश्वास नहीं करता है. तथा हिंसा का मार्ग अपनाता है, जिसके परिणामस्वरूप समाज में हिंसा व विभाजन की भावना फेलती है.

3.     वस्तुओ के उत्पादन में कमी:- समाजवाद के आलोचकों का तर्क है कि यदि उत्पादन के सम्पूर्ण साधनों पर समाज का नियंत्रण कर दिया जायेगा तो व्यक्ति की कार्य करने का आत्मविश्वास है वो समाप्त हो जायेगा और कार्यक्षमता भी धीरे-धीरे घट जायेगी. क्यूंकि व्यक्तियों को अपनी योग्यता को प्रदर्शित करने का अवशर नहीं मिलेंगा.

  

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