कभी बेचे पान, कभी की चपरासी की नौकरी,फिर बने आईएएस ऑफिसर.

 जय हिन्द दोस्तों आज के इस लेख में हम एसी शक्शियत के बारे में जानने की कोशिश करेंगे,जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर वो मुकाम हासिल किया जिस मुकाम को हासिल करने का हम और आप केवल सपना ही देखते है वो शख्स कोई और नहीं आईएएस मोहम्मद हिसाब है जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर एक गरीब परिवार से होने के बाद भी पढाई-लिखाई की और आईएएस बनकर अपने और अपने गाँव शहर और जिले का नाम रोशन किया

अपने सपनो को पूरा करने के लिए कभी पान बचे तो कभी की चपरासी की नौकरी. 

IAS Mohmmad Hisab

आईएएस एक इसी नौकरी जिसे करने का हर एक स्टूडेंट का सपना होता है. क्यूंकि आईएएस बनने के बाद समाज में बदलाव करने की जो पॉवर मिलती है. शायाद ही किसी और नोकरी में मिले. इसलिए हर एक स्टूडेंट का सपना UPSC करने का होता है.

परन्तु इसमें बहुत कम लोग ही सफल हो पाते है. UPSC (आईएएस) का exam दुनिया का दूसरा और भारत का पहला सबसे कठिन एग्जाम माना जाता है. कुछ स्टूडेंट तो UPSC की तैयारी 10वीं - 12वीं से ही शुरू कर देते है जबकि कुछ स्टूडेंट इसकी तैयारी ग्रेजुएशन-पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद शुरू करते है. और आईएएस बनकर देश सेवा करते है. 

अपने सपनो को पूरा करने के लिए मोहम्मद हिसाब ने कभी बेचे पान तो कभी की चपरासी की नौकरी, और अंत में उनका सपना हुआ पूरा और बने आईएएस अधिकारी. 

मोहम्मद हिसाब के बारे में कम्पलीट जानकारी

मोहम्मद हिसाब केरल के एक जिले मलप्पुरम के एक छोटे से गाँव में रहते थे, और अपनी फैमली के साथ रहते थे, जब हिसाब छोटे थे उस समय उनके साथ एक दुर्घटना घटी. 

दुर्घटना ये घटी की मोहम्मद हिसाब के पिता जी का देहांत हो गया. इस घटना ने मोहम्मद हिसाब की फैमली को झकझोर के रख दिया. घर की स्थिति बहुत ख़राब हो गयी. और मोहम्मद हिसाब को अनाथालय भेज दिया गया, मोहम्मद हिसाब अनाथ आश्रम में 10 साल रहे. हिसाब को पढाई लिखाई का शौक था, इसलिए हिसाब ने पढाई लिखाई शुरू की जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति ख़राब हो गई, तो मोहम्मद हिसाब ने पान बेचना शुरू कर दिया. इसी बीच मोहम्मद हिसाब ने अपनी पढाई फिर से शुरू की. और इतिहास विषय से B.A किया.

अब मोहम्मद हिसाब का करियर एक प्राइमरी अध्यापक के रूप में शुरू हुआ. इसके बाद हिसाब का चयन कई अन्य पदों पर भी हुआ. जैसे....

कलर्क, चपरासी, जेल वार्डन, रेलवे टिकेट अधिकारी समेत अन्य पदों पर हुआ, तथा ग्राम पंचायत में उनका चयन क्लर्क के पद पर हुआ. 

इसी बीच मोहम्मद हिसाब ने एक आईएएस अधिकारी बनने की ठानी. इस पूरी प्रक्रिया में मोहम्मद हिसाब की शादी हो चुकी थी. 

इसी समय हिसाब के साथ फिर एक घटना हुई, हिसाब के घर एक नन्ही परी ने जन्म लिया परन्तु इसके एक हाथ में पैरालाइसिस था. सिविल सर्विस की तैयारी और फिर बच्ची के लिए हॉस्पिटल के चक्कर के बीच हिसाब को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

परन्तु मोहम्मद हिसाब की मेहनत और लोगो की दुआओ ने साथ दिया और साल 2011 में मोहम्मद हिसाब ने सिविल सर्विस एग्जाम पास किया और एक सिविल अधिकारी बने.


सपने उन्ही के पुरे होते है, जिनके सपनो में जान होती है.

पंखो से कुछ नहीं होता, मेरे दोस्त, होसलों से उढान होती है.




आईएएस बनने से पहले दोस्त उड़ाते थे मजाक, आईएएस बनकर दिया जवाब.

कभी बेचे पान, कभी की चपरासी की नौकरी,फिर बने आईएएस ऑफिसर. कभी बेचे पान, कभी की चपरासी की नौकरी,फिर बने आईएएस ऑफिसर. Reviewed by Teck Qureshi on मई 29, 2021 Rating: 5

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