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गाय पर निबंध हिंदी, गाय पर निबंध कैसे लिखे.

 गाय पर निबंध हिंदी में.

जय हिन्द दोस्तों स्वागत है आपका आज के इस लेख में, दोस्तों आज के इस लेख में हम बात करेंग, ‘गाय के निबंध' के बारे में. गाय का उल्लेख हमारे वेदों में भी पाया जाता है. कहा जाता है कि, गाय में सभी देवी-देवताओं का वास (निवास) होता है. बड़े-बुजुर्गो की कहावत है कि, जिस घर में गाय का निवास होता है उस घर के सारे वास्तु-दोष अपने आप खत्म हो जाते हैं.


  1. 1. गाय की भूमिका.
    2. गाय की उपयोगिता
    3. गाय की शारीरिक संरचना
    4. गायों की प्रमुख नस्लें
    5. गाय के रंग
    6. गाय का धार्मिक महत्व
    7.
    दज्जल और धन्नी प्रजाति 

     8.मेवाती, हासी-हिसार

     निष्कर्ष



भूमिका : का यूं तो पूरी दुनिया में ही काफी महत्व है, लेकिन भारत के संदर्भ में बात की जाए तो प्राचीन काल से यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। चाहे वह दूध का मामला हो या फिर खेती के काम में आने वाले बैलों का। वैदिक काल में गायों की संख्‍या व्यक्ति की समृद्धि का मानक हुआ करती थी। दुधारू पशु होने के कारण यह बहुत उपयोगी घरेलू पशु है। 

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गाय की उपयोगिता : गाय का दूध बहुत ही पौष्टिक होता है। यह बीमारों और बच्चों के लिए बेहद उपयोगी आहार माना जाता है। इसके अलावा दूध से कई तरह के पकवान बनते हैं। दूध से दही, पनीर, मक्खन और घी भी बनाता है। गाय का घी और गोमूत्र अनेक आयुर्वेदिक औषधियां बनाने के काम भी काम आता है।
गाय का गोबर फसलों के लिए सबसे उत्तम खाद है। गाय के मरने के बाद उसका चमड़ा, हड्डियां व सींग सहित सभी अंग किसी न किसी काम आते हैं।

अन्य पशुओं की तुलना में गाय का दूध बहुत उपयोगी होता है। बच्चों को विशेष तौर पर गाय का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है क्योंकि भैंस का दूध जहां सुस्ती लाता है, वहीं गाय का दूध बच्चों में चंचलता बनाए रखता है। माना जाता है कि भैंस का बच्चा (पाड़ा) दूध पीने के बाद सो जाता है, जबकि गाय का बछड़ा अपनी मां का दूध पीने के बाद उछल-कूद करता है।

गाय न सिर्फ अपने जीवन में लोगों के लिए उपयोगी होती है वरन मरने के बाद भी उसके शरीर का हर अंग काम आता है। गाय का चमड़ा, सींग, खुर से दैनिक जीवनोपयोगी सामान तैयार होता है। गाय की हड्‍डियों से तैयार खाद खेती के काम आती है।


गाय की शारीरिक संरचना : गाय का एक मुंह, दो आंखें, दो कान, चार थन, दो सींग, दो नथुने तथा चार पांव होते हैं। पांवों के खुर गाय के लिए जूतों का काम करते हैं। गाय की पूंछ लंबी होती है तथा उसके किनारे पर बालो का एक गुच्छा भी होता है, जिसे वह मक्खियां मच्छर आदि उड़ाने के काम में लाती है। गाय कीअधिकतर प्रजातियो  में सींग नहीं होते।

गायों की प्रमुख नस्लें : गायों की यूं तो कई नस्लें होती हैं, लेकिन भारत में मुख्‍यत: सहिवाल (पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, बिहार), गीर (दक्षिण काठियावाड़), थारपारकर (जोधपुर, जैसलमेर, कच्छ), करन फ्राइ (राजस्थान) आदि हैं। विदेशी नस्ल में जर्सी गाय सर्वाधिक लोकप्रिय है। यह गाय दूध भी अधिक देती है। भारतीय गाय छोटी होती है, जबकि विदेशी गाय का शरीर थोड़ा भारी होता है।

दज्जल और धन्नी प्रजाति :

ये गाय की तीन प्रजातीय है जो कि पंजाब में पंजाब में पाई जाती हैं। यह काफी फुर्तीली मानी जाती है। धन्नी प्रजाति ज्यादा दूध नहीं देती। परन्तु दज्जल काफी दूध देती हैं.
मेवाती, हासी-हिसार : यह हरियाणा पाये जाने वाली प्रमुख नस्लें हैं। मेवाती नस्ल का उपयोग मुख्यत: कृषि कार्य में किया जाता है। जबकि हासी-हिसार हरियाणा के हिसार क्षेत्र में मिलती हैं

गाय के रंग :  गाय कई रंगों जैसे सफेद, काला, लाल, बादामी तथा चितकबरी होती है। तथा गाये में कई अन्य कलर और भी पाये जाते है.
गाय का धार्मिक महत्व : भारत में गाय को देवी का दर्जा दिया जाता है. ऐसी मान्यता है कि गाय के शरीर में 33 करोड़ देवता  निवास है। यही कारण है कि दिवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा के अवसर पर गायों की विशेष पूजा की जाती है और उनका मोर पंखों आदि से श्रृंगार किया जाता है।
प्राचीन भारत में गाय समृद्धि का प्रतीक मानी जाती थी। युद्ध के दौरान स्वर्ण, आभूषणों के साथ गायों को भी लूट लिया जाता था। जिस राज्य में जितनी गायें होती थीं उसको उतना ही सम्पन्न माना जाता है। कृष्ण के गाय प्रेम को भला कौन नहीं जानता। इसी कारण उनका एक नाम गोपाल भी है।

निष्कर्ष : दुर्भाग्य से शहरों में जिस तरह पॉलिथिन का उपयोग किया जाता है और उसे फेंक दिया जाता है, उसे खाकर गायों की असमय मौत हो जाती है। इस दिशा में सभी को गंभीरता से विचार करना होगा ताकि हमारी 'आस्था' और 'अर्थव्यवस्था' के प्रतीक गोवंश को बचाया जा सके। कुल मिलाकर गाय का मनुष्य के जीवन में बहुत महत्व है। गाय आज भी
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
 

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